DNS क्या होता है What is DNS

Domain Name System क्या होता है? DNS definition : Domain Name System को short मे DNS भी कहते है |DNS का काम Domain Name को IP Address मे convert करना होता है | जब हम किसी भी domain name को web browser मे टाइप करते है तो ये DNS उसको IP Address मे कन्वर्ट करता है | इसी प्रकार किसी भी Network मे किसी भी Computer एवं host name को भी ये IP Address मे कन्वर्ट करता है| यह इसलिए होता है क्योकि हम IP Address की तुलना मे Alphanumeric Name easily याद रख सकते है |एक उदहारण की लिए – जब हम http://www.example.com को browser मे टाइप करते है तो DNS इसको 198.15.45.18 मे या इसी प्रकार की किसी valid IP Address मे चेंज केर देता है| अब आप खुद देखिए हमको http://WWW.example.com याद करना कितना आसान है जबकि IP address याद करना कितना मुश्किल|

इंटरनेट शुरूआती दौर में ऐसा नहीं था और बहुत कम websites थी उनका पता एक ip address 233.222.111.102 जैसा कुछ होता था लेकिन भविष्य की संभावनाओ को देखते हुए domain नाम प्रणाली को बनाया गया क्योंकि आज के दौर में मौजूद करोड़ों वेबसाइटों का प्रबंधन करना बड़ी मुश्किल का काम है। अगर हर वेबसाइट को पहचानने की व्यवस्था न हो तो इंटरनेट की कोई उपयोगिता नहीं रह जाती है । जब भी कोई वेबसाइट इंटरनेट पर रखी जाती है तो उसे एक आई. पी. एड्रेस दिया जाता है जो अंकों में होता है, जैसे- 233.222.111.102। जरा सोचिए कि अगर आपको बहुत सी वेबसाइटों के इस तरह के पते याद रखने पड़ें तो वह कितना मुश्किल होगा। इसी वजह से वेबसाइटों के लिए डोमेन नेम व्यवस्था लागू की गई है। यह डोमेन नेम उस वेबसाइट के आई. पी. एड्रेस का विकल्प है। जब हम अपने इंटरनेट ब्राउजर में किसी वेबसाइट का डोमेन नेम डालते हैं तो domain name सर्वर पर उसे आई. पी. एड्रेस में परिवर्तित कर दिया जाता है और हम संबंधित वेबसाइट तक पहुंच जाते हैं। आई. पी. एड्रेस की तुलना में domain name को याद रखना बहुत आसान है इसलिए यह व्यवस्था पहले के मुकाबले कंही सरल होती है |
इंटरनेट कारपोरेशन फॉर असाइन्ड नेम्स एंड नंबर्स (ICANN) एक अमेरिकी संस्था है जो दुनिया भर के domains को मैनेज करती है | अगर आप अपनी website के लिए या blog के लिए कोई custom domain लेना चाहते है तो आपको ICANN से सर्टिफाइड किसी भी domain name registrar से अपना domain register करना होता है |

अब हम जानते है की Public IP Address के केस मे अनगिनत DNS और IP Address हो सकते है तो केवल एक सर्वर सभी की information को save करके नहीं रख सकता, इसी वजह से जब query एक सर्वर के पास आती है एवं उस सर्वर को IP Address नहीं पता होता या वो उस query को resolve नहीं कर पता तो वो query को उससे connected दूसरे सर्वर के पास भेज देता है| यह Pass on तब तक चलता है जब तक query resolve नहीं हो जाती एवं IP Address नहीं मिल जाता|

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